खामोश व वीरान-सी आँखें
हिचकियों में टूटती सांसें
आसपास कुछ ढूँढती हैं
जाने क्या कुछ बूझती हैं
टटोलती हैं धरा पर
नंगे पैरों सरक सरक कर
छिलते घुटनों पर मंडराती मक्खियों
को हटाते भगाते
जमीन पर पड़े कंकरों पत्थरों से
खुद को बचाते बचाते.
पर हाथ में आता है
सिर्फ गोश्त का टुकड़ा
कोई इसे हिन्दू बताता
कोई मुस्लमान का कहता
कोई सांप्रदायिकता की संज्ञा देता
कोई धर्मनिरपेक्षता का राग अलापता
पर कोई तो बताओ उस दुधमुंहे मासूम का है क्या दोष
भूख से तड़पती आत्मा को तृप्त करने के लिए
माँ की छाती समझ वह लोथड़े को भी मुँह लगाता
और मुख में दूध की जगह खून भरा आता
सैकड़ों लाशों के बीच
मरे- अधमरों के संग
रक्त सना मुख लिए एक मासूम सा चेहरा
क्या वह इस देश का भविष्य है !!
हिचकियों में टूटती सांसें
आसपास कुछ ढूँढती हैं
जाने क्या कुछ बूझती हैं
टटोलती हैं धरा पर
नंगे पैरों सरक सरक कर
छिलते घुटनों पर मंडराती मक्खियों
को हटाते भगाते
जमीन पर पड़े कंकरों पत्थरों से
खुद को बचाते बचाते.
पर हाथ में आता है
सिर्फ गोश्त का टुकड़ा
कोई इसे हिन्दू बताता
कोई मुस्लमान का कहता
कोई सांप्रदायिकता की संज्ञा देता
कोई धर्मनिरपेक्षता का राग अलापता
पर कोई तो बताओ उस दुधमुंहे मासूम का है क्या दोष
भूख से तड़पती आत्मा को तृप्त करने के लिए
माँ की छाती समझ वह लोथड़े को भी मुँह लगाता
और मुख में दूध की जगह खून भरा आता
सैकड़ों लाशों के बीच
मरे- अधमरों के संग
रक्त सना मुख लिए एक मासूम सा चेहरा
क्या वह इस देश का भविष्य है !!
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