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Showing posts from August, 2010

गर्भ रुदन

मैं अजन्मी हूँ अंश तुम्हारा फिर क्यों गैर बनाते हो है मेरा क्या दोष जो, ईश्वर की मर्जी झुठलाते हो ... मै माँस-मज्जा का पिण्ड नहीं दुर्गा, लक्ष्मी औ‘ भवानी हूँ भावों के पुंज से रची नित्य रचती सृजन कहानी हूँ लड़की होना किसी पाप की निशानी तो नहीं फिर मैं तो अभी अजन्मी हूँ मत सहना मेरे लिए क्लेश मत सहेजना मेरे लिए दहेज मैं दिखा दूँगी कि लड़कों से कमतर नहीं माद्दा रखती हूँ श्मशान घाट में भी अग्नि देने का बस विनती मेरी है मुझे दुनिया में आने तो दो!!