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Showing posts from November, 2010

क्या बदल गया बिहार?

हिटलशाही के दौर में एक कहावत बहुत मशहूर हुई थी. एक झूठ को सौ बार बोलो, वो सच हो जाएगा. और बकायदा झूठ को प्रचारित करने के लिए हिटलर ने एक मंत्री की भी नियुक्ति की थी. ताजा उदाहरण बिहार सरकार है. विकास और सुशासन की छवि, जो यहां बनी नहीं बनाई गई है, उसमें भी इसी फॅर्मूले का इस्तेमाल किया गया है. यानि, जितना विकास हुआ नहीं उससे कहीं ज्यादा इसके बारे में लोगों को बताया जा रहा है. और,बार-बार बताया जा रहा है. जाहिर है, इसके लिए मीडिया का सहारा लिया गया और जम कर विज्ञापन बांटे गए. सूबे के मुख्यमंत्री नीतीशकुमार के चार साल के कार्यकाल में करीब 65 करोड रूपये से भी ज्यादा के विज्ञापन विभिन्न अखबारों और न्यूज चैनलों को बांटे गए. जाहिर है, बुलबुल भी वैसी ही नाचेगी जैसे पैसा देने वाला चाहता है. हुआ भी ऐसा ही. करोडों का विज्ञापन लेने के बाद मीडिया ने भी बिहार की ऐसी छवि बनाई मानो सचमुच बिहार अब भूखमुक्त,भयमुक्त, भ्रष्टाचरमुक्त हो गया है.मीडिया ने नीतीश कुमार की जितनी बड़ी छवि गढ़ी है, बिहार की जनता ने उससे कई गुना बड़ा जनादेश उनको दिया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार विधानसभा में...

ओबामा की भारत यात्रा बनाम अमेरिका का भविष्य

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा 2008 में जब पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने तब मीडिया ने उन्हें किस्मत का धनी करार दिया। खुद ओबामा ने भी इस बात को स्वीकारा, लेकिन एक सच यह भी है कि ओबामा ने व्हाइट हाउस में जिस दिन कदम रखा था उसी दिन भाग्य उनका साथ छोड़ गया था। पूर्ववर्ती जॉर्ज डब्ल्यू बुश की सनक भरी नीतियों के परिणामस्वरूप इराक-अफगान युद्ध, आतंकवाद और चरमराई हुई अर्थव्यवस्था जैसी दुष्कर चुनौतियां ओबामा को विरासत में मिलीं। अमेरिकी उन्हें करिश्माई मानते हैं, इसलिए उम्मीदें का बोझ उनके कंधों पर कुछ ज्यादा ही है। ऐसा नहीं कि वह हर मोर्चे पर असफल ही रहे हैं, लेकिन आर्थिक बदहाली ने अमेरिकियों में कुछ ज्यादा ही असंतोष पैदा कर दिया है। इसमें शक नहीं कि ओबामा वादों को पूरा करने का दम रखते हैं। इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी उन्हीं के प्रयासों से हुई। बुश प्रशासन से तुलना करें तो ओबामा के निर्णय बेहतर साबित हुए हैं। रूस-अमेरिका के बीच मित्रता इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, लेकिन बेरोजगार होते अमेरिकी इंतजार नहीं करना चाहते हैं और ना ही उनमे और इंतज़ार करने का दम बचा है। वे बदलाव को विकल्प के रूप में दे...