कोरोनावायरस से उपजे विशाल जन स्वास्थ्य समस्या के बीच हम एक और बड़ी विपदा से नमूदार हो रहे हैं वह है मालिकों द्वारा अपने कामगारों को अधर में छोड़ दिया जाना और उससे भी परे सरकारों द्वारा इस ओर बिल्कुल भी ध्यान ना देना। आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 का दुरुपयोग करते हुए कामगारों के घर लौटने के अधिकार को रोक दिया गया है और उनके भोजन आवास और चिकित्सा सुविधा को लेकर किसी प्रकार का कोई प्रबंध नहीं दीख रहा है। यहां तक कि राज्यों द्वारा घोषित भोजन और नकदी की राहत भी अधिकांश कामगारों तक नहीं पहुंच रही है। भुखमरी से शुरू हुई या समस्या लाखों लाख मजदूरों के पैदल घर लौटने तक जा पहुंची है। इनमें से बहुत लोग रास्तों में ही कॉल कल वित हो जा रहे हैं। 1 महीने से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन केंद्र सरकार ने इन मजदूरों को घर लौटने से संबंधित और स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। मालिक और मालिकों के संग इकट्ठा होकर जहां-तहां अनुचित दबाव का प्रयोग कर इन्हें वापस लौटने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार भी यात्रा सुविधाओं में देरी कर इन मालिकों के लिए मजदूरों की अबाधित आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरसक प्रयास कर रही है। उद्योग...
सबको अपने हित की बातें करनी थीं हम पागल थे, मुद्दा लेकर बैठ गये।