मैं गीता हूँ आज के युग की
क्यों कृष्ण के इन्तजार मैं बैठूं
मात्र भगवत मुख वाचन के लिए
अपने भाग्य पर इतराऊँ ऐठूँ
बीत गया वह समय जब
अर्जुन भीष्म का विपक्षी होता था
छाती पर वाण चलाने से पहले
शत्रु के पैर वह छूता था
मर्यादाये अब शेष हुई
न रहा सिद्धांत कोई बांकी
गांधी, नेहरु और शास्त्री के
वचनों की मात्र शेष रही झांकी
पांडव न बचा राजनीति मैं कोई
बस कौरव ही घुस आये हैं
शकुनी साथ था उनके
ये तो शकुनी के ही जाए हैं.
ध्रितराष्ट्र बनी सारी जनता
बस हाहाकार मचाती है
द्रौपदी का चीरहरण जब होता
मूक-बधिर हो जाती है
कुरुक्षेत्र की इस भूमि पर
अब शंखनाद मैं स्वयं करूंगी
चिरनिद्रा मैं सोये युवाओं के
प्राणों में स्वयं मैं ओज भरूँगी
न सोचो के बस वचनमात्र से
गीता के उपदेश सुनाऊँगी
जो वक्त पड़ा तो थाम गांडीव स्वयं
युद्धभूमि मैं भी उतर आऊँगी
मैं महाभारत के इस देश मैं
युगक्रांति लेकर आऊँगी
क्यों कृष्ण के इन्तजार मैं बैठूं
मात्र भगवत मुख वाचन के लिए
अपने भाग्य पर इतराऊँ ऐठूँ
बीत गया वह समय जब
अर्जुन भीष्म का विपक्षी होता था
छाती पर वाण चलाने से पहले
शत्रु के पैर वह छूता था
मर्यादाये अब शेष हुई
न रहा सिद्धांत कोई बांकी
गांधी, नेहरु और शास्त्री के
वचनों की मात्र शेष रही झांकी
पांडव न बचा राजनीति मैं कोई
बस कौरव ही घुस आये हैं
शकुनी साथ था उनके
ये तो शकुनी के ही जाए हैं.
ध्रितराष्ट्र बनी सारी जनता
बस हाहाकार मचाती है
द्रौपदी का चीरहरण जब होता
मूक-बधिर हो जाती है
कुरुक्षेत्र की इस भूमि पर
अब शंखनाद मैं स्वयं करूंगी
चिरनिद्रा मैं सोये युवाओं के
प्राणों में स्वयं मैं ओज भरूँगी
न सोचो के बस वचनमात्र से
गीता के उपदेश सुनाऊँगी
जो वक्त पड़ा तो थाम गांडीव स्वयं
युद्धभूमि मैं भी उतर आऊँगी
मैं महाभारत के इस देश मैं
युगक्रांति लेकर आऊँगी
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