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राजीव गांधी: एक अविस्मरणीय राष्ट्रनायक, एक मनोहारी व्यक्तित्व


भारत आज एक डिजिटल संस्कृति अख्तियार कर रहा है और अंततः पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का स्वप्न साकार हो रहा है जिन्होंने भारत को एक तकनीकी गुरु बनने का स्वप्न देखा था। उनका विश्वास था “भारत कोई गतिहीन देश नहीं है। हम प्रगतिशील हैं। हम निरंतर प्रवाह में हैं। हमारा समाज, हमारी अर्थव्यवस्था निरंतर आगे बढ़ रही है। विज्ञान और तकनीक इस विकास की कुंजी होनी चाहिए।“

कंप्यूटर से भारत का परिचय करवाकर तकनीक के युग की शुरुआत करने की उनकी दूरदृष्टि हमेशा देश के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद की जाएगी। भले ही देश को तकनीकी रूप से सशक्त देश बनाने की उद्घोषणा की शुरुआत 2014 में हुई हो लेकिन वास्तव में “डिजिटल इंडिया” के सूत्रधार राजीव गांधी ही थे।

“भारत युवा जनसंख्या का एक प्राचीन देश है। मैं भी युवा हूं और मेरे भी कुछ स्वप्न है मेरा स्वप्न है कि भारत मजबूत स्वतंत्र आत्मनिर्भर बने और मानव सेवा में विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में इसकी गणना हो”-स्वर्गीय राजीव गांधी ऐसा अक्सर कहा करते थे। भारत के प्रधानमंत्री केरु के रूप में अपने संक्षिप्त कार्यकाल में अपने कुछ ऐतिहासिक कदमों के द्वारा आधुनिक भारत की नींव डालने में वे समर्थ हुए।

स्व० श्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 में मुंबई में हुआ. जब भारत को अंग्रेजी शासन की गुलामी से आजादी मिली तो इनकी उम्र महज तीन साल थी. देश आज़ाद हुआ और उनके नाना यानी स्व० पं० जवाहर लाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने. राजीव गांधी का बचपन तीन मूर्ति भवन में बीता. फिर वे कुछ समय के लिए देहरादून के वेल्हम स्कूल गए लेकिन जल्द ही उन्हें हिमालय की तलहटी में स्थित आवासीय दून स्कूल में भेज दिया गया. स्कूली शिक्षा समाप्त करने के बाद वे लंदन गए और वहां ए लेवल पूरी करके इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला लिया। वहां 3 साल पढ़ाई करने के बाद वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए लंदन के इंपीरियल कॉलेज में दाखिल हुए। लेकिन बाद में उन्होंने कई बार स्वीकार किया कि वह अंको की लूट-खसोट से ज्यादा सीखने में यकीन रखते थे। उनका यह दृष्टिकोण कालांतर में उनकी नई शिक्षा नीति में परिलक्षित हुआ।स्व० राजीव गांधी ने दिल्ली फ्लाइंग क्लब में दाखिला लेकर पायलट की ट्रेनिंग ली और 1970 में एयर इंडिया में पायलट के रूप में सेवा देना शुरू किया। जानी-मानी अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल के साथ अपने एक साक्षात्कार में राजीव गांधी ने कहा था कि-“हवाई जहाज उड़ाने से उनका नाता तब जुड़ा जब उनके नाना स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू उन्हें ग्लाइडिंग क्लब ले गए थे। उनके शब्दों में-“मुझे बहुत मजा आया! मुझे आज भी मजा आता है। इससे आपको एक उन्मुक्ति का एहसास होता है। यह आपको हालातों की सारी मुश्किलों से दूर उड़ा ले जाता है।“

बहुत कम लोगों को इस सत्य की जानकारी होगी कि भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री एक बहुत ही जबरदस्त छायाकार भी थे। जबकि फोटोग्राफी उनको अत्यधिक आनंद देती थी उनका मानना था कि फोटोग्राफी के लिए आपको बहुत ही खुले दिल का होना पड़ता है। कई जगहों पर इसका जिक्र हुआ है कि उनके जीवन काल में कई प्रकाशकों ने उनके चित्रों को पुस्तक के रूप में सामने लाने के लिए कई अवसर पर उनके सामने प्रस्ताव किए लेकिन पद पर रहते हुए स्वर्गीय राजीव गांधी पद की गरिमा को सर्वोपरि मानते रहे और ऐसे किसी प्रस्ताव को हमेशा स्वीकार करते रहे।उनके निधन के उपरांत उनकी पत्नी श्रीमती सोनिया गांधी श्रद्धांजलि स्वरूप  पिछले 40 वर्षों में उनके द्वारा खींचे गए छाया चित्रों को एक पुस्तक के रूप में सामने लेकर आईं। पुस्तक का नाम था-“Rajiv’s World: photographs by Rajiv Gandhi”. यह पुस्तक राजीव गांधी की जीवनी जैसी है जिसमें हमारे पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन से संबंधित हर महत्वपूर्ण घटना उनके कैमरे के द्वारा दिखती है।

1980 की शुरुआत में जब  स्व० राजीव गांधी राजनीति में आए तो वह न केवल इसके लिए अनेक शब्द बल्कि इस माहौल से पूरी तरह अनजान भी थे। हालांकि ऐसा कई लोग मानते हैं कि उनके इस अनजानेपन का लाभ उनको हुआ कि राजनीति से अलहदा उनकी छवि हर तरह के विवादों से परे थी। युवा नेता के रूप में उनकी अपील देश के युवाओं को प्रभावित करती थी। 1984 में जब उनकी उम्र 40 साल भी नहीं थी और उनका व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक था, इस दौरान युवाओं में उनकी छवि अविस्मरणीय थी। यह माना जाता है। यह माना जाता है की उस दौरान विपक्षी दलों के पास भी उनके ऊपर आक्षेप लगाने के लिए कुछ खास नहीं हुआ करता था और इस कारण उन्हें “मिस्टर क्लीन” की उपाधि मिली क्योंकि उन्होंने देश के लोगों से भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करने का वायदा किया था।

स्वर्गीय राजीव गांधी देश के पहले प्रधानमंत्री थे जोकि 100 फ़ीसदी सार्वकालिक थे। उन्होंने राजनीति तब शुरू की जब देश राजनीतिक रूप से उनकी पार्टी के विरोध में था। शीघ्र ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया, उसके बाद वे ना सिर्फ पार्टी का नेतृत्व करने के लिए आगे आए बल्कि आम चुनाव में जनता का अभूतपूर्व समर्थन हासिल किया। ऐसा समर्थन जो आज तक किसी भी नेता को हासिल नहीं हुआ है। सरकार बनाते ही उन्होंने देश से नए भारत को 21वीं शताब्दी में ले जाने का वादा किया, देश में कंप्यूटर युग की शुरुआत की और पूरे विश्व को अपनी युवा गंभीरता से मंत्रमुग्ध किया (उनका अमर वाक्य-“मैं युवा हूं मेरे भी कुछ सपने हैं”) ने समां बांध दिया जब वे अमेरिकी संसद कैपिटोल हिल को संबोधित कर रहे थे और वही से उन्होंने भारत के नाभिकीय सशक्तिकरण की शुरुआत की थी।

जबकि उन्होंने चुनाव में शानदार जनादेश प्राप्त किया और जनता से किए हर वादे को निभाने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किए। देश को एक सामरिक महाशक्ति एक उन्नत राष्ट्र और एक पावर हाउस बनाने का सपना जो उन्होंने देखा था उस को साकार करने के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत की। चला कि इस दौरान वह बहुत सी जटिल और कठिन समस्याओं से 24 हुए खास तौर पर पंजाब, कश्मीर और असम में पांव पसार रहा अलगाववाद, बाबरी मस्जिद का विवाद, शाहबानो मामला, बोफोर्स सौदे से जुड़े हुए मिथ्या आरोप श्रीलंका में तमिल समस्या इत्यादि। अपने कार्यकाल में आसाम और मिजोरम के शांति समझौते उनकी उल्लेखनीय सफलता थी। पंजाब में शांति स्थापित कराने के लिए उन्होंने इतना बड़ा दिल दिखाया की उन्होंने विद्रोही नेताओं के हाथ में सत्ता जाना भी स्वीकार कर लिया। उनके इसी बड़े दिल के कारण असम और मिजोरम का शांति समझौता उनके महत्वपूर्ण योगदानों में शामिल है। उस दौरान जबकि खालिस्तानी विदेशों में, खास तौर पर कनाडा में, बहुत सशक्त हो चुके थे। बहुत सारे नामचीन खालिस्तानी विद्रोही वहां फरार हो गए थे। एयर इंडिया का एक विमान कनिष्क जून 1985 में हवा में विस्फोट द्वारा उड़ा दिया गया था और तब जबकि स्वयं स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कई दिन और रातें अपने और अपने परिवार के ऊपर खतरे की आशंका मैं गुजारी होंगी क्योंकि उस दौर का सबसे खतरनाक आतंकवादी गुरबचन सिंह मनोचहल खतरे की तरह आसपास मंडरा रहा था। खतरा इस कदर बड़ा था कि जब यह हुआ आतंकवादी पकड़ा गया तो उसकी जांच के बारे में प्रधानमंत्री जी को एजेंसियां लगातार सूचित कर रही थी। इतने बड़े खतरे के बावजूद उनकी मनोस्थिति डगमगाई नहीं। पंजाब में सिर उठाते आतंकवाद को उन्होंने 1988 में “ऑपरेशन ब्लैक थंडर” की शल्य क्रिया द्वारा संपूर्ण उपचार कर दिया। हालांकि पंजाब कीइस आग को राजीव जी पूरी तरह शांत नहीं कर पाए पर इतना कम कर दिया कि वह शनै: शनै: अपने आप शांत हो गई।

कांग्रेस पार्टी के नेता के रुप में स्वर्गीय राजीव गांधी ने राष्ट्रीय मंच पर प्रजातांत्रिक, संघीय और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के साथ आम सहमति के मूल मंत्र के साथ काम किया। क्योंकि वह देश की एकता और अखंडता के साथ राष्ट्र की सामाजिक उपलब्धियों के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे। उनका स्वप्न राष्ट्र को उन उपलब्धियों तक पहुंचाना था जो सदियों की गुलामी के कारण हमसे दूर हो चुकी थी। वह देश के लिए 21वीं सदी की ओर अग्रसर एक युवा और आधुनिक राष्ट्र का सुनहरा ख्वाब बुनते रहते थे। यह तभी संभव हो सकता था जबकि सामाजिक सौहार्द्र और आर्थिक वृद्धि के साथ एक स्थाई सरकार देश में कार्य करें।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तान की तत्कालीन राष्ट्रध्यक्ष श्रीमती बेनजीर भुट्टो, सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव और चीन के राष्ट्राध्यक्ष डेंग जियाओपेंग के साथ उन्होंने जबरदस्त समर्थन वाले रिश्ते स्थापित किए। स्वर्गीय राजीव गांधी के पिता तुल्य लोगों और युवा समकालिकों से बराबर के रिश्ते उनकी मनोहारी मुस्कान नेक इरादे और गंभीर उद्देश्यों के कारण और मजबूत होते गए। भारत उनके नेतृत्व में गुटनिरपेक्ष और अपनें असहमति के बावजूद आदरणीय तथा तेजतर्रार बना रहा। उदारवाद के उस दौर में देश की आर्थिक उन्नति दर को तेज बनाए रखना समय की मांग थी। फोन का आधुनिक दिमाग, कंप्यूटर के प्रति लगाव, पंचायती राज के प्रति उनकी निष्ठा और ऊर्जा क्षेत्र की क्रमागत उन्नति देश की प्रगति में उनके महत्वपूर्ण योगदान है। भारत का आणविक शस्त्रीकरण और सामरिक सशक्तिकरण की योजनाएं उनके ऐसे योगदान है जिसके लिए आने वाली सरकारों ने उन्हें कभी श्रेया नहीं दिया। शायद लोगों को याद ना हो लेकिन दिल्ली के नजदीक तिलपत में भारतीय वायु सेना के शक्ति प्रदर्शन के दौरान तब के महत्वपूर्ण नौकरशाह नरेश चंद्रा को बुलाकर उन्हें सशक्तिकरण अभियान का प्रमुख बना दिया जिसके परिणाम स्वरूप अंततः पोखरण 2 देश के सामने आया। स्वर्गीय श्री राजीव गांधी ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए दो नई खोजें की जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड या एनएसजी तथा विशेष सुरक्षा समूह या एसपीजी का नाम दिया।

स्वर्गीय श्री राजीव गांधी के नेतृत्व में सरकार ने आर्थिक नीतियों के ढांचे में कुछ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव किए जिनमें से ध्यान आकर्षक था विदेश व्यापार का उदारीकरण जिसके कारण निजी आया तो पर नियंत्रण को कब किया गया और औद्योगिक निवेश की सीमा को बढ़ाया गया तथा लाइसेंस परमिट राज को समाप्त किया गया। यह कहना समीचीन ना होगा की इसकी वजह से आपूर्ति आधारित अर्थव्यवस्था की ओर देश का रुझान बढ़ता गया। इस कदम के पूरक रुप में उन्होंने आयकर की दरों में 1985 में कटौती की ताकि मांग क्षेत्र में उछाल आए और ठीक ऐसा ही हुआ। उन्होंने कृषिगत आय को पूरी तरह आयकर के दायरे से बाहर रखा और यह सारे परिवर्तन गैर कृषि क्षेत्र से संबंधित रहे। इस प्रकार के आर्थिक सुधारों ने ना सिर्फ भविष्य की नई आर्थिक नीतियों की नींव रखी बल्कि कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त तथा उपयोगी बना दिया।

 स्व० राजीव गांधी एक ऐसे देशभक्त थे जिन्होंने अत्यंत कठिन बेला में देश का शासन संभाला। हालांकि उनकी कठिनाई की तीव्रता  को उन्हें मिले असाधारण जनमत ने जाहिर भले ना होने दिया हो, लेकिन अपनी मां की हत्या के तीव्र व्यक्तिगत हिंसा के दर्दनाक लम्हे को समेटते हुए देश की बागडोर संभालना और एक कुशल नेतृत्व देना शायद उनके लिए ही संभव था। इस दुखद घटना क्रम के लगभग 7 साल बाद वह स्वयं भी ऐसी ही घृणास्पद हिंसा के शिकार बने, देश के पहले और विश्व के शायद अकेले मानव बम के शिकार राष्ट्राध्यक्ष। इन बीच के 7 सालों में उन्होंने बहुत सारे अच्छे काम किए और देश के लिए समृद्ध विरासत छोड़ गए। 21 मई 1991 को 40 वर्ष की उम्र में राजीव गांधी देश सेवा में शहीद हो गए। उनकी 76वीं वर्षगांठ पर उनके अविश्वसनीय कार्य उनके भीतर के देशभक्त की याद दिलाते हैं। उन्होंने देश को एक सफल नेतृत्व दिया और एक दूरदृष्टि दी और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके सपनों को साकार करने के लिए कठिन परिश्रम करें।

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