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दिल्ली की बारिश: डर लागे गरजे बदरिया

दिल्ली की बारिश मानो लौटरी, दिल्ली तक आते-आते बादलों का हाथ तंग हो जाता है, सो सोच समझ बरसते हैं। खैर दिल्ली में हर काम में सोचा जयादा जाता है, किया कम जाता है। चाहे वो नेता हों या जनता। बादलो को यह भाषा दिल्ली में घुसते ही समझ आ जाती है फिलहाल हाल तो हमेशा की तरह यही है की बारिश न हो तो समस्या और अगर हो जाए तो दिल्ली वालों की मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं।दिल्ली में मंगलवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने दिल्ली वासियों से मुरझाये चेहरे पर खुशी की लहर ला दी. सुलगती गर्मी के आतंक से झुलसती दिल्ली ने बारिश की बुंदों से राहत की सांस ली है। सुबह हुई बारिश ने तापमान काफी कम कर दिया जिसके कारण मौसम बेहद सुहावना हो गया था. पर मंगलवार के बाद हालाँकि कल बुधवार को दिल्ली में हुई बारिश की मात्र कुछ खास नहीं मात्र २१.२ मिमी ही थी, पर इतनी ही बारिश दिल्ली की सिविक एजेंसियों की तैयारी को दिखने के लिए काफी था. दिल्लीवासियों के लिए यह एक भयावह मंजर था. मेरी एक घनिष्ठ मित्र जो की एक निजी बैंक में काम करती हैं उन्होंने बताया की जैसे ही उन्होंने डीएनडी फ्लायओवर का गेट पार किया और रिंग रोड पर पहुंची तो करीबन चार घंटे तक वह रिंग रोड पर ही फँसी रही. किसी तरह उन्होंने अपनी कार शांति पथ की तरफ मोड़ी तो उधर भी जाम. अंततः वह अपने घर नारायणा पहुंची पर करीब ६ घंटे के बाद. अन्य मार्गों पर ट्रेफिक रेंगता तो रहा पर सबसे बुरी हालत थी सेन्ट्रल, दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली की. धौला कुआँ पर ग्रेड विभाजक का एक हिस्सा तो पानी में ऐसा डूबा की उसे बंद करना पड़ा और उसका असर तुरंत दिखा शांति पथ, मोती बाग, अफ्रीका अवेन्यु मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, रिज रोड, इन सबों पर ऐसा ट्रेफिक जाम हुआ की सेन्ट्रल दिल्ली से आने वाले ट्राफिक के लिए इन्हें बंद करना पड़ा. मंगलवार की बारिश के बाद राजधानी के कई अंडरपास और फ्लाई ओवरों के ढलानों पर भरा पानी बुधवार की दोपहर तक भी निकल नहीं पाया था। बुधवार दोपहर बाद हुई तेज बारिश से धौला कुआं अंडरपास लबालब हो गया, जिसकी वजह से आसपास के सभी रास्तों पर भारी जाम लग गया। आर.के. पुरम और मुनीरका तक गाड़ियों की कतारें लगी हुई थीं, तो दूसरी तरफ दिल्ली कैंट तक जाम था। वाहन चालकों ने तीन मूर्ति और ग्यारह मूर्ति का रुख किया, तो वहां भी कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। स्विमिंग पूल बन चुके धौला कुआं अंडरपास के सामने ट्रैफिक पुलिसवाले बेबस नजर आए। ग्रीन पार्क से युसूफ सराय के बीच सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस जाने से अरबिंदो मार्ग जाम हो गया. हालात तो और ख़राब तब हो गए जब की कई ट्राफिक सिग्ननल बारिश और पॉवर कट की वजह से फेल हो गए और चौराहों और सड़कों पर बिलकुल अराजक स्थिति उत्पन्न हो गयी. एम् बी रोड पर एक भी सिग्नल काम नहीं कर रहा था. गाड़ियाँ रोंग साइड चल रही थी और एक एक क्रोसिंग पार करने में १५ से २० मिनट लग रहा था. सुनने में यह भी आया की आश्रम और सराय काले खान के बीच वी आइ पी मोवेमेंट की वजह से करीब आधे घंटे के लिए डी एन डी फ्लाय ओवर को बंद किया गया था पर उसकी वजह से जो जाम शुरू हुआ वह इंडिया गेट तक फ़ैल गया क्योंकि ये सारे इलाके थोड़ी देर के लिए ही सही ट्राफिक मोवेमेंट के लिए रोक दिए गए थे ताकि वी आइ पी को कोई अवरोध ना मिले. पर यह एक सच्चाई है की सिविक एजेन्सिएस यथा एमसीडी की गैर दूरंदेशी का नतीजा आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका थी। मॉनसून की पहली ही बारिश में एमसीडी के तमाम दावे धरे रह गए और जगह-जगह हुए जलभराव से लोगों को दिक्कतें हुईं। सोमवार को तो बंद की वजह से सड़कों पर ट्रैफिक बहुत कम था, इसलिए हालात सामान्य लग रहे थे, लेकिन मंगलवार सुबह राजधानी के कई इलाकों में हुई तेज बारिश के बाद जब लोग घरों से निकले, तो उन्हें जगह-जगह सड़क पर भरे पानी के बीच से गुजरना पड़ा। इस साल भी ट्रैफिक पुलिस ने मॉनसून से काफी पहले एमसीडी को आगाह कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद वैसा ही हुआ जैसा हर साल होता है। कई सड़कें स्विमिंग पूल में तब्दील हो गई और ट्रैफिक जाम के हालात बन गए। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चल रहे निर्माण कार्यों की वजह से पहले ही दिल्ली की सड़कों की हालत खस्ता है, ऐसे में मॉनसून की पहली बारिश से यह भी साफ हो गया कि आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं।
सबसे ज्यादा जलभराव राजधानी के अंडरपास और फ्लाईओवरों के ढलानों पर हुआ। अशोक विहार के पास लॉरेंस रोड पर बने जिस नए-नवेले अंडरपास का दो दिन पहले ही धूमधाम से उद्घाटन किया गया था, उसमें मंगलवार को बारिश के बाद घुटने-घुटने तक पानी भर गया। पानी भर जाने की वजह से कई वाहन यहां से गुजरते वक्त खराब होकर बंद हो गए, जिन्हें धक्का लगाकर निकालना पड़ा। इसकी वजह से आसपास के रास्ते पर लंबा जाम लग गया। धौलाकुआं, द्वारका, मूलचंद, प्रेम बाड़ी और वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित रेलवे अंडरपास का भी यही हाल हुआ। यहां भी जलभराव से ट्रैफिक पर असर पड़ा और जाम के हालात बने रहे।इसके अलावा शादीपुर, मोती बाग, पंजाबी बाग, कीर्ति नगर और जखीरा जैसे व्यस्त फ्लाईओवरों के ढलानों पर जलभराव की वजह से देर तक जाम लगा रहा। मायापुरी-रिंग रोड क्रॉसिंग, नारायणा टी पॉइंट, मोती नगर, कर्मपुरा, जीटी करनाल डिपो, जहांगीरपुरी कैरिज वे, ब्रिटानिया चौक और संसद विहार से पीतमपुरा पुलिस लाइन की तरफ जाने वाले रास्ते पर जलभराव से जाम के हालात बने रहे। वेस्ट पटेल नगर में बारिश से ठीक पहले केबल डालने के लिए सड़क खोदी गई थी, लेकिन बारिश के बाद उसमें पानी भर गया और मंगलवार को एक कार उसमें फंस गई। कार चालक बाल-बाल बचा। उधर, कनॉट प्लेस में भी बारिश के बाद बुरा हाल हो गया और दोपहर में यहां भी जाम लगा रहा। यहां चल रहे निर्माण कार्य की वजह से पहले ही पैदल चलना दूभर हो गया था, ऐसे में बारिश के बाद हालात और खराब हो गए। यहां जगह जगह पानी भर गया और कीचड़ जमा हो गया। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक , मंगलवार को ट्रैफिक हेल्पलाइन पर सुबह से शाम तक जलभराव की वजह से जाम लगने संबंधी 15 कॉल्स आईं , जबकि एमसीडी के सेंट्रल कंट्रोल रूम में जलभराव संबंधी 55 और पेड़ गिरने की 4 कॉल आईं। जलभराव की सबसे ज्यादा 13 कॉल्स रोहिणी जोन से आई , जबकि 11 कॉल्स साउथ जोन से आई। ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि अगर एमसीडी के इंतजामों का यही हाल रहा , तो आने वाले दिन वाहन चालकों के लिए और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं।
वास्तविकता तो यह है की राजधानी दिल्ली हर मानसून में भीगी बिल्ली बन बैठती है। यह प्रशासन को भी पता होता है कि मानसून में बारिश होगी और पानी भरेगा। इसकी तैयारियों के लिए ड्रेनेज सफाई के नाम पर पैसे भी पानी की तरह बहते हैं। पानी निकासी की परियोजनाएं ागजों पर पैसे की निकासी की जाती है। इंतजाम की पोल मानसून खोलता है। बरसाती नालों पर अवैध कब्जों से प्राकृतिक जल निकासी की व्यवस्था नहीं रही, कृत्रिम अव्यवस्था का अंजाम जनता भोगे।

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